गोरखपुर में प्रदेश अध्यक्ष पंकज चौधरी के स्वागत में नहीं दिखे मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ, दिल्ली में रहे मौजूद, राजनीतिक हलकों में उठे सवाल

 गोरखपुर में प्रदेश अध्यक्ष पंकज चौधरी के स्वागत में नहीं दिखे मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ, दिल्ली में रहे मौजूद, राजनीतिक हलकों में उठे सवाल

गोरखपुर (एएसपी टाइम्स)भारतीय जनता पार्टी के प्रदेश अध्यक्ष पंकज चौधरी के गोरखपुर आगमन पर आयोजित भव्य स्वागत समारोह में मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ की अनुपस्थिति ने राजनीतिक गलियारों में चर्चाओं को तेज कर दिया है। कार्यक्रम में जहां उत्तर प्रदेश के कोने-कोने से पार्टी पदाधिकारी, सांसद, विधायक, जिला अध्यक्ष और हजारों की संख्या में कार्यकर्ता शामिल हुए, वहीं मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ स्वयं इस कार्यक्रम में मौजूद नहीं रहे।

गोरखपुर, जिसे मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ का राजनीतिक गढ़ और कर्मभूमि माना जाता है, उसी शहर में प्रदेश अध्यक्ष के स्वागत कार्यक्रम के दौरान मुख्यमंत्री की गैरमौजूदगी कई तरह के राजनीतिक संकेतों को जन्म दे रही है। कार्यकर्ताओं के बीच यह चर्चा दिनभर बनी रही कि आखिर अपने ही शहर में इतने बड़े संगठनात्मक कार्यक्रम में मुख्यमंत्री क्यों नहीं पहुंचे।

कार्यक्रम स्थल पर बड़े-बड़े होर्डिंग, बैनर और पोस्टर लगे थे। मंच पर प्रदेश अध्यक्ष पंकज चौधरी के साथ कई वरिष्ठ नेता मौजूद थे। स्वागत के दौरान फूलमालाओं, नारों और ढोल-नगाड़ों के साथ प्रदेश अध्यक्ष का जोरदार अभिनंदन किया गया। पूरे कार्यक्रम के दौरान संगठन की ताकत और एकजुटता का प्रदर्शन साफ नजर आया।

हालांकि, मंच पर मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ की अनुपस्थिति हर किसी की नजर में रही। कई कार्यकर्ताओं ने मंच की ओर देखते हुए यह भी कहा कि अगर मुख्यमंत्री मौजूद होते तो कार्यक्रम की भव्यता और बढ़ जाती।

सूत्रों के मुताबिक, मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ उस दिन राजधानी दिल्ली में मौजूद थे। बताया जा रहा है कि वे वहां कुछ महत्वपूर्ण राजनीतिक और प्रशासनिक बैठकों में शामिल होने के लिए गए थे। हालांकि, मुख्यमंत्री कार्यालय की ओर से इस दौरे को लेकर कोई औपचारिक बयान सामने नहीं आया।

प्रदेश अध्यक्ष पंकज चौधरी ने अपने संबोधन में मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ की जमकर प्रशंसा की। उन्होंने कहा कि उत्तर प्रदेश आज जिस विकास की राह पर आगे बढ़ रहा है, उसका श्रेय मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के मजबूत नेतृत्व को जाता है। उन्होंने यह भी कहा कि सरकार और संगठन मिलकर प्रदेश को नई ऊंचाइयों तक ले जा रहे हैं।

इसके बावजूद, राजनीतिक जानकारों का मानना है कि गोरखपुर जैसे शहर में प्रदेश अध्यक्ष के स्वागत कार्यक्रम से मुख्यमंत्री का दूर रहना सामान्य घटना नहीं मानी जा सकती। खासकर तब, जब कार्यक्रम पूरी तरह संगठन से जुड़ा हुआ था और प्रदेश स्तर का था।

कार्यक्रम में शामिल नेताओं ने इसे मुख्यमंत्री की व्यस्तता बताया। उनका कहना था कि मुख्यमंत्री का कार्यक्रम पहले से तय था और दिल्ली में उनकी मौजूदगी राज्य के हित में थी। उन्होंने यह भी कहा कि इससे किसी तरह का राजनीतिक संदेश निकालना गलत होगा।

दूसरी ओर, विपक्षी दलों ने इस मुद्दे को लेकर भाजपा पर निशाना साधा। समाजवादी पार्टी और कांग्रेस के नेताओं ने बयान जारी कर कहा कि भाजपा के अंदर सब कुछ ठीक नहीं चल रहा है और यह गैरमौजूदगी उसी का संकेत है। विपक्ष ने दावा किया कि संगठन और सरकार के बीच तालमेल की कमी सामने आ रही है।

कार्यक्रम में शामिल कार्यकर्ताओं के बीच भी अलग-अलग राय देखने को मिली। कुछ कार्यकर्ताओं ने कहा कि मुख्यमंत्री का न आना सामान्य बात है, क्योंकि वे प्रदेश और देश की जिम्मेदारियों में व्यस्त रहते हैं। वहीं, कुछ कार्यकर्ताओं ने माना कि मुख्यमंत्री की उपस्थिति से कार्यक्रम को और अधिक मजबूती मिलती।

गोरखपुर में इससे पहले आयोजित कई बड़े कार्यक्रमों में मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ की सक्रिय भागीदारी रही है। वे अक्सर संगठनात्मक कार्यक्रमों में भी शामिल होते रहे हैं। ऐसे में इस बार उनकी गैरहाजिरी को लेकर चर्चाएं होना स्वाभाविक माना जा रहा है।

कार्यक्रम के दौरान आगामी चुनावों को लेकर रणनीति पर भी चर्चा की गई। प्रदेश अध्यक्ष ने बूथ स्तर तक संगठन को मजबूत करने का आह्वान किया। उन्होंने कहा कि कार्यकर्ताओं की मेहनत के बल पर भाजपा एक बार फिर बड़ी जीत दर्ज करेगी।

प्रदेश भर से आए नेताओं ने मंच से संगठन की एकता और सरकार की उपलब्धियों को जनता तक पहुंचाने की बात कही। कई नेताओं ने मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के नेतृत्व को पार्टी की सबसे बड़ी ताकत बताया।

राजनीतिक विश्लेषकों का कहना है कि मुख्यमंत्री की अनुपस्थिति को फिलहाल किसी निष्कर्ष पर पहुंचना जल्दबाजी होगी, लेकिन यह जरूर है कि यह मुद्दा राजनीतिक चर्चाओं के केंद्र में आ गया है।

भाजपा नेतृत्व का कहना है कि संगठन और सरकार के बीच कोई मतभेद नहीं है और आने वाले दिनों में मुख्यमंत्री और प्रदेश अध्यक्ष साथ दिखाई देंगे। पार्टी नेताओं ने इसे पूरी तरह सामान्य घटना बताया है।

फिलहाल गोरखपुर का यह कार्यक्रम राजनीतिक हलकों में चर्चा का विषय बना हुआ है। मुख्यमंत्री की दिल्ली मौजूदगी और गोरखपुर में उनकी अनुपस्थिति को लेकर कयासों का दौर जारी है।

आने वाले समय में मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ और प्रदेश अध्यक्ष पंकज चौधरी के संयुक्त कार्यक्रम इन चर्चाओं पर विराम लगाएंगे या नहीं, यह देखना दिलचस्प होगा।

कुल मिलाकर, प्रदेश अध्यक्ष के स्वागत समारोह में मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ की गैरमौजूदगी ने सियासी माहौल को जरूर गरमा दिया है, और इस पर राजनीतिक नजरें टिकी हुई हैं।

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